अध्याय 1: इतिहास के स्रोत (Sources of History)

— साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)

एक खोया हुआ ग्रंथ…

साल 1834… एक ब्रिटिश अधिकारी, जेम्स प्रिंसेप, वाराणसी के संकरी गलियों में घूम रहे थे। अचानक एक स्थानीय व्यापारी ने उन्हें एक प्राचीन तांबे की पट्टी दिखाई। उस पर कुछ अजीबो-गरीब लिपि में लेख अंकित था।

जेम्स प्रिंसेप ने महीनों की मेहनत के बाद उस लिपि को पढ़ा और पाया कि यह एक शिलालेख था, जिसमें सम्राट अशोक के आदेश अंकित थे। यह खोज भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में मील का पत्थर साबित हुई।

लेकिन… अगर सिर्फ शिलालेख ही होते तो क्या हमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पूरा ज्ञान मिल पाता? नहीं! हमारी असली धरोहर तो उन साहित्यिक स्रोतों में छिपी है, जिन्हें ऋषियों, मुनियों, कवियों और इतिहासकारों ने शब्दों के मोतियों में पिरोया है।

आइए, अब इन साहित्यिक स्रोतों की गहराई में उतरते हैं।


साहित्यिक स्रोत (Literary Sources) का परिचय

साहित्यिक स्रोत वे लेखन सामग्री हैं जो प्राचीन भारत के इतिहास को समझने में सहायता करती हैं। ये स्रोत हमें तत्कालीन समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में गहन जानकारी देते हैं।

साहित्यिक स्रोत मुख्यतः पांच भागों में विभाजित हैं:

  1. वैदिक साहित्य
  2. महाकाव्य एवं पुराण
  3. बौद्ध एवं जैन साहित्य
  4. संस्कृत साहित्य
  5. विदेशी यात्रियों के उल्लेख

1. वैदिक साहित्य: ऋषियों की वाणी में छिपी विरासत

कभी आपने सोचा है कि जब लिपि का विकास नहीं हुआ था, तब ज्ञान कैसे सुरक्षित रहता था? भारत में वेदों की रचना श्रुति परंपरा के माध्यम से हुई, यानी सुनकर याद करने की प्रक्रिया से। वेदों को पीढ़ी दर पीढ़ी कंठस्थ करके सुरक्षित रखा गया।

(क) वेद

वेदों को ‘अपौरुषेय’ कहा जाता है, यानी ये मानव द्वारा रचित नहीं माने जाते, बल्कि दिव्य ज्ञान का स्रोत माने जाते हैं।

चार प्रमुख वेद:

  1. ऋग्वेद: सबसे प्राचीन ग्रंथ, जिसमें 1,028 सूक्त (स्तुतियाँ) हैं। इसमें देवताओं की स्तुति, युद्ध, समाज और जीवनशैली का उल्लेख है।
  2. सामवेद: इसमें ऋग्वेद के कुछ मंत्रों को संगीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  3. यजुर्वेद: इसमें यज्ञों में बोले जाने वाले मंत्रों का संकलन है।
  4. अथर्ववेद: इसमें जादू-टोने, चिकित्सा, घरेलू उपचार और सामाजिक जीवन का वर्णन है।

रोचक तथ्य:

  • ऋग्वेद में ‘सप्त सिंधु’ (सात नदियाँ) का उल्लेख है, जिससे उस समय पंजाब क्षेत्र में आर्यों के निवास का प्रमाण मिलता है।
  • ऋग्वेद के एक प्रसिद्ध सूक्त में कहा गया है — “एकोहम बहुस्यामि” (मैं एक हूँ, लेकिन अनेक रूपों में प्रकट हूँ) — जिससे अद्वैतवाद का सिद्धांत उपजता है।

(ख) ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक और उपनिषद

  • ब्राह्मण ग्रंथ: ये यज्ञों के विधान और मंत्रों की व्याख्या करते हैं।
  • आरण्यक: ये ग्रंथ वनवासियों और साधकों के लिए लिखे गए थे, जिनमें ध्यान, तप और योग का वर्णन है।
  • उपनिषद: इन्हें ‘वेदांत’ भी कहा जाता है। इनमें आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष जैसे दार्शनिक विषयों पर चर्चा होती है।

उदाहरण:

  • छांदोग्य उपनिषद में सत्य, धर्म और आत्मा पर गहन विचार प्रस्तुत हैं।
  • ईशोपनिषद में कहा गया है — “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा:” (त्यागपूर्वक भोग करो) — जो भारतीय जीवनशैली का आदर्श बन गया।

2. महाकाव्य एवं पुराण: वीरता और धर्म की गाथाएँ

भारत के दो महान ग्रंथ — रामायण और महाभारत न केवल साहित्यिक रचनाएँ हैं, बल्कि समाजशास्त्र, राजनीति और धर्मशास्त्र का भी भंडार हैं।

(क) रामायण:

  • रचनाकार: वाल्मीकि
  • इसमें राम के जीवन, उनके आदर्शों, पारिवारिक मूल्यों और धर्म पर आधारित शिक्षाएँ मिलती हैं।

रोचक तथ्य: रामायण में कुल 24,000 श्लोक हैं और इसे ‘आदि-काव्य’ भी कहा जाता है।


(ख) महाभारत:

  • रचनाकार: व्यास
  • इसमें कौरव-पांडव संघर्ष, कुरुक्षेत्र युद्ध और श्रीकृष्ण के उपदेश शामिल हैं।

रोचक तथ्य: महाभारत में कुल 1 लाख श्लोक हैं, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य बनाता है।


(ग) पुराण:

  • पुराणों की संख्या: 18 मुख्य पुराण
  • इनमें सृष्टि, देवताओं, राजवंशों और सांस्कृतिक परंपराओं का वर्णन मिलता है।
  • भागवत पुराण में श्रीकृष्ण के जीवन का सुंदर वर्णन है।

3. बौद्ध एवं जैन साहित्य: सामाजिक सुधारों का प्रमाण

  • बौद्ध साहित्य: त्रिपिटक (सुत्त पिटक, विनय पिटक, अभिधम्म पिटक)
  • जैन साहित्य: अंग, उपांग एवं कल्पसूत्र

4. संस्कृत साहित्य: कला और संस्कृति का दर्पण

  • कालिदास की रचनाएँ: ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’, ‘मेघदूत’, ‘रघुवंशम्’
  • विशाखदत्त का ‘मुद्राराक्षस’ — इसमें चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य के राजनीतिक कौशल का वर्णन है।

5. विदेशी यात्रियों के विवरण:

विदेशी यात्रियों के वृत्तांत भारत के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन का मूल्यवान स्रोत हैं।

यात्रीदेशकालमुख्य विवरण
मेगस्थनीजग्रीसमौर्य काल‘इंडिका’ में मौर्य प्रशासन का वर्णन
फाह्यानचीनगुप्त काल‘फो-को-की’ में समाज का चित्रण
ह्वेनसांगचीनहर्ष काल‘सी-यू-की’ में शिक्षा व्यवस्था का वर्णन

भारतीय इतिहास को जानने का सबसे समृद्ध स्रोत हमारा साहित्य ही है। वेदों के दार्शनिक विचार हों, रामायण की पारिवारिक शिक्षाएँ हों या महाभारत की कूटनीति — हर ग्रंथ में अतीत का एक अनमोल खजाना छिपा है।

इतिहास के स्रोत (Sources of History) — पुरातात्त्विक स्रोत (Archaeological Sources)


‘अशोक का राज’ — एक रहस्य से पर्दा उठता है…

साल 1837… वाराणसी के एक अर्धनग्न साधु के पास एक रहस्यमयी पत्थर था, जिस पर अजीब-सी लिपि में कुछ खुदा हुआ था। इस पत्थर को देखने के लिए एक ब्रिटिश अधिकारी, जेम्स प्रिंसेप, वहाँ पहुँचे। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने उस लिपि को पढ़ने में सफलता प्राप्त की।

लिपि थी — ब्राह्मी लिपि
लेख था — धम्म लिपि
लेखक था — सम्राट अशोक

यह खोज भारतीय इतिहास में मील का पत्थर थी। इससे न केवल सम्राट अशोक का अस्तित्व प्रमाणित हुआ, बल्कि मौर्य साम्राज्य की गौरवशाली कहानी भी सामने आई।

अब सोचिए… यदि ये शिलालेख न होते तो क्या हमें अशोक जैसे महान सम्राट के बारे में इतनी गहराई से जानने का अवसर मिलता?

यह घटना साबित करती है कि इतिहास को जानने में पुरातात्त्विक स्रोत का विशेष महत्व है।


पुरातात्त्विक स्रोत (Archaeological Sources) का परिचय

पुरातात्त्विक स्रोत वे भौतिक अवशेष होते हैं जो अतीत की घटनाओं, संस्कृतियों और समाज के बारे में जानकारी देते हैं। इनमें शिलालेख, सिक्के, मूर्तियाँ, भवनों के अवशेष, औजार और उपकरण शामिल होते हैं।

पुरातात्त्विक स्रोतों को मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जाता है:

  1. अभिलेख (Inscriptions)
  2. सिक्के (Coins)
  3. मूर्तियाँ एवं चित्रकला (Sculptures & Paintings)
  4. स्थापत्य अवशेष (Architectural Remains)

1. अभिलेख (Inscriptions): पत्थरों पर अंकित इतिहास

अभिलेख वे लेख होते हैं जो धातु, पत्थर, मिट्टी या अन्य कठोर सतहों पर खुदे होते हैं। ये स्रोत तत्कालीन शासकों, राजवंशों, प्रशासनिक नीतियों और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

प्रमुख अभिलेख एवं उनका महत्व:

अभिलेख का नामराजा/कालविषयविशेषता
अशोक के शिलालेखअशोक (मौर्य काल)धम्म नीति, अहिंसा, समाज सुधारब्राह्मी, खरोष्ठी और ग्रीक लिपियों में लिखे गए
प्रयाग प्रशस्तिसमुद्रगुप्त (गुप्त काल)समुद्रगुप्त की विजय यात्राकवि हरिषेण द्वारा रचित
ऐहोल प्रशस्तिपुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य वंश)दक्षिण भारत के शासकों का विवरणसंस्कृत भाषा में रचित
जूनागढ़ अभिलेखरुद्रदमन (शक शासक)सिंचाई व्यवस्था का वर्णनसंस्कृत का सबसे प्राचीन शिलालेख

रोचक तथ्य: अशोक के शिलालेख भारत, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैले हुए हैं, जिससे मौर्य साम्राज्य के विशाल क्षेत्र का प्रमाण मिलता है।


2. सिक्के (Coins): धातु में छिपी कहानियाँ

प्राचीन भारत के सिक्के तत्कालीन शासकों, आर्थिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने का उत्कृष्ट साधन हैं।

सिक्कों के आधार पर प्राप्त जानकारियाँ:

  1. राजाओं के नाम और उपाधियाँ — कुषाण राजा कनिष्क के सिक्कों पर ‘महान सम्राट कनिष्क’ अंकित है।
  2. धार्मिक प्रतीक — गुप्त कालीन सिक्कों पर लक्ष्मी, दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं के चित्र अंकित थे।
  3. व्यापार मार्गों का प्रमाण — रोमन सिक्कों की भारत में उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत का रोम साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंध था।

प्रमुख सिक्कों का विवरण:

सिक्के का कालराजवंशविशेषता
शुंग वंशशुंग वंशपंचमार्क सिक्के (चिह्नित प्रतीक)
कुषाण वंशकुषाण वंशबौद्ध, हिंदू एवं यूनानी प्रतीकों का समावेश
गुप्तकालीन सिक्केगुप्त वंशस्वर्ण मुद्राएँ (Gold Coins)

रोचक तथ्य: समुद्रगुप्त के सिक्कों पर उन्हें वीणा बजाते हुए दर्शाया गया है, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।


3. मूर्तियाँ एवं चित्रकला (Sculptures & Paintings): कला का जीवंत प्रमाण

मूर्तियाँ और भित्ति चित्र तत्कालीन समाज, धर्म और संस्कृति के प्रतीक होते हैं।

प्रमुख मूर्तियाँ और उनका महत्व:

  1. सांची का स्तूप — इसमें बुद्ध के जीवन से संबंधित दृश्य चित्रित हैं।
  2. अमरावती स्तूप — इसमें बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण प्रसंग अंकित हैं।
  3. गांधार कला — इसमें ग्रीक शैली में निर्मित बुद्ध प्रतिमाएँ पाई जाती हैं।
  4. मथुरा कला — इसमें भगवान कृष्ण और अन्य हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ प्रसिद्ध हैं।

रोचक तथ्य: अजंता की गुफाओं में चित्रित ‘बोधिसत्व पद्मपाणि’ चित्र विश्वविख्यात है।


4. स्थापत्य अवशेष (Architectural Remains): पत्थरों में गढ़ा इतिहास

प्राचीन भारत के भवन, मंदिर, स्तूप, किले और गुफाएँ तत्कालीन कला, स्थापत्य शिल्प और विज्ञान का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

प्रमुख स्थापत्य अवशेष:

  1. सांची का स्तूप (मध्य प्रदेश) — बौद्ध कला का उत्कृष्ट उदाहरण।
  2. कोणार्क का सूर्य मंदिर (ओडिशा) — इसे ‘ब्लैक पगोडा’ भी कहा जाता है।
  3. एलीफेंटा गुफाएँ (महाराष्ट्र) — इसमें शिव के ‘अर्धनारीश्वर’ स्वरूप की विशाल प्रतिमा अंकित है।

रोचक तथ्य: एलोरा की गुफाओं में निर्मित ‘कैलाश मंदिर’ एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है, जो विश्व की अद्वितीय वास्तुकला में गिना जाता है।


पुरातात्त्विक स्रोत भारतीय इतिहास को प्रमाणिक रूप से जानने का एक मजबूत आधार प्रस्तुत करते हैं। ये स्रोत हमें उन कालखंडों के बारे में बताते हैं, जिनका विवरण साहित्य में नहीं मिलता।

विदेशी यात्रियों के विवरण (Accounts of Foreign Travelers)


‘जब भारत की खोज में आए अनजान मुसाफिर…’

साल 399 ईस्वी… एक चीनी भिक्षु फाह्यान ने भारत आने का निश्चय किया। हजारों मील का कठिन सफर, घने जंगल, दुर्गम पहाड़ और डाकुओं से भरे रास्ते… लेकिन फाह्यान रुके नहीं। उन्हें उस ‘सुवर्ण भूमि’ (Golden Land) को देखने की लालसा थी, जिसे भारत कहा जाता था।

जब वे भारत पहुँचे तो उन्होंने देखा — समृद्ध नगर, विशाल स्तूप, बुद्ध के अनुयायियों के भव्य मठ और एक ऐसा समाज जो धर्म, दर्शन और कला में अद्वितीय था।

फाह्यान ने अपने अनुभवों को एक पुस्तक में लिखा — ‘फो-को-की’ (A Record of Buddhist Kingdoms)। उनकी पुस्तक भारत के समाज, धर्म और प्रशासन का अनमोल दस्तावेज बन गई।

भारत आने वाले ऐसे ही कई विदेशी यात्रियों ने हमें प्राचीन भारत का प्रमाणिक चित्र प्रस्तुत किया है।


विदेशी यात्रियों के भारत आगमन के कारण

विदेशी यात्री विभिन्न उद्देश्यों से भारत आए थे, जिनमें प्रमुख कारण थे:

  1. धार्मिक यात्रा: बौद्ध धर्म के अध्ययन और तीर्थयात्रा के लिए (जैसे फाह्यान, ह्वेनसांग)।
  2. व्यापार: भारत के मसाले, रेशम और बहुमूल्य धातुओं के व्यापार हेतु (जैसे इब्न बतूता, मार्को पोलो)।
  3. राजनीतिक मिशन: भारतीय राजाओं के दरबार में राजनयिक संबंध स्थापित करना (जैसे मेगस्थनीज)।
  4. ज्ञान व खोज: भारतीय विज्ञान, गणित और चिकित्सा पद्धति के अध्ययन हेतु (जैसे अल-बरूनी)।

प्रमुख विदेशी यात्री एवं उनके विवरण

1. मेगस्थनीज (Megasthenes)

  • देश: यूनान (ग्रीस)
  • काल: चंद्रगुप्त मौर्य का शासनकाल (ईसा पूर्व चौथी शताब्दी)
  • रचना: ‘इंडिका’
  • प्रमुख विवरण:
    • मौर्य साम्राज्य का प्रशासनिक ढाँचा
    • पाटलिपुत्र का भव्य वर्णन
    • भारतीय समाज को ‘सात वर्गों’ में विभाजित बताया

रोचक तथ्य: मेगस्थनीज ने लिखा कि “भारत में कभी कोई दास प्रथा नहीं थी,” जो कि एक विवादास्पद कथन माना जाता है।


2. फाह्यान (Faxian)

  • देश: चीन
  • काल: गुप्त वंश का शासनकाल (चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का काल, 5वीं शताब्दी)
  • रचना: ‘फो-को-की’ (A Record of Buddhist Kingdoms)
  • प्रमुख विवरण:
    • गुप्तकालीन समाज में शांति, समृद्धि और धार्मिक सहिष्णुता का वर्णन
    • नालंदा और बोधगया के मठों का उल्लेख
    • कहा कि “भारत में अपराध नगण्य थे और लोग सच्चाई का पालन करते थे।”

रोचक तथ्य: फाह्यान भारत में पैदल यात्रा करते हुए गंगा घाटी और मथुरा तक पहुँचे थे।


3. ह्वेनसांग (Xuanzang / Hiuen Tsang)

  • देश: चीन
  • काल: हर्षवर्धन का शासनकाल (7वीं शताब्दी)
  • रचना: ‘सी-यू-की’ (Records of the Western World)
  • प्रमुख विवरण:
    • हर्षवर्धन के दरबार का सजीव वर्णन
    • नालंदा विश्वविद्यालय का विस्तृत विवरण
    • भारत में बौद्ध धर्म के पतन के संकेत

रोचक तथ्य: ह्वेनसांग को “भारत का चीनी तीर्थयात्री” कहा जाता है।


4. अल-बरूनी (Al-Biruni)

  • देश: फारस (ईरान)
  • काल: महमूद गजनवी का काल (11वीं शताब्दी)
  • रचना: ‘तहकीक-ए-हिंद’ (Kitab-ul-Hind)
  • प्रमुख विवरण:
    • भारतीय समाज, धर्म, दर्शन और विज्ञान का गहन अध्ययन
    • हिंदू धर्म, वेदों और भारतीय गणित का विश्लेषण
    • वर्ण व्यवस्था का निष्पक्ष अध्ययन

रोचक तथ्य: अल-बरूनी ने भारतीय संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत का अध्ययन किया था।


5. इब्न बतूता (Ibn Battuta)

  • देश: मोरक्को
  • काल: मुहम्मद बिन तुगलक का शासनकाल (14वीं शताब्दी)
  • रचना: ‘रिहला’ (The Travels)
  • प्रमुख विवरण:
    • दिल्ली सल्तनत के दरबार का जीवंत चित्रण
    • तुगलक शासक की क्रूरता और प्रशासन का वर्णन
    • भारतीय व्यापार मार्गों और नगरों की समृद्धि का वर्णन

रोचक तथ्य: इब्न बतूता ने भारत में लगभग 7 वर्ष व्यतीत किए थे।


6. मार्को पोलो (Marco Polo)

  • देश: इटली (वेनेटियन व्यापारी)
  • काल: पांड्य वंश का शासनकाल (13वीं शताब्दी)
  • रचना: ‘द ट्रेवल्स ऑफ मार्को पोलो’
  • प्रमुख विवरण:
    • दक्षिण भारत के व्यापारिक नगरों का उल्लेख
    • भारतीय मसालों और वस्त्र उद्योग का वर्णन
    • कोणार्क के सूर्य मंदिर और तंजावुर के भव्य मंदिरों का चित्रण

विदेशी यात्रियों के विवरण का महत्व

विदेशी यात्रियों के वृत्तांत हमें भारतीय इतिहास के उन पहलुओं के बारे में बताते हैं, जिनका वर्णन भारतीय स्रोतों में कम मिलता है। इन विवरणों का महत्व इस प्रकार है:

✅ तत्कालीन समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और धर्म का सजीव चित्रण
✅ भारतीय नगरों, व्यापारिक मार्गों और शिक्षा संस्थानों का उल्लेख
✅ ऐतिहासिक घटनाओं की प्रमाणिक पुष्टि


प्रमुख यात्रियों का सारणीबद्ध विवरण

यात्री का नामदेशकालग्रंथमुख्य विषय
मेगस्थनीजग्रीसमौर्य काल‘इंडिका’मौर्य प्रशासन व समाज
फाह्यानचीनगुप्त काल‘फो-को-की’बौद्ध धर्म व गुप्तकालीन समाज
ह्वेनसांगचीनहर्षवर्धन काल‘सी-यू-की’नालंदा विश्वविद्यालय
अल-बरूनीफारसगजनवी काल‘तहकीक-ए-हिंद’भारतीय धर्म व विज्ञान
इब्न बतूतामोरक्कोतुगलक काल‘रिहला’दिल्ली सल्तनत
मार्को पोलोइटलीपांड्य काल‘द ट्रेवल्स ऑफ मार्को पोलो’दक्षिण भारत का व्यापार

निष्कर्ष

विदेशी यात्रियों के वृत्तांत भारतीय इतिहास को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत हैं। इन यात्रियों ने न केवल तत्कालीन समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और धर्म का वर्णन किया, बल्कि उन्होंने भारतीय जनजीवन के उन पक्षों को भी उजागर किया, जो अन्य स्रोतों में कम पाए जाते हैं।

इन यात्रियों की आँखों से देखा गया भारत एक ऐसा देश था, जहाँ विशाल नगर, समृद्ध व्यापार, उन्नत शिक्षा व्यवस्था और धार्मिक सहिष्णुता के अद्भुत उदाहरण मिलते थे। फाह्यान ने भारतीय समाज में व्याप्त शांति को सराहा, ह्वेनसांग ने शिक्षा के केंद्र नालंदा की प्रशंसा की, इब्न बतूता ने भारतीय शासकों की प्रशासनिक दक्षता को रेखांकित किया, और अल-बरूनी ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान के महत्व को स्वीकारा।

हालाँकि, इन वृत्तांतों में कई स्थानों पर अतिशयोक्ति और व्यक्तिगत दृष्टिकोण का समावेश भी मिलता है। अतः इन स्रोतों का अध्ययन करते समय अन्य प्रमाणों के साथ तुलना करना आवश्यक है।

संक्षेप में, विदेशी यात्रियों के विवरण प्राचीन भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को गहराई से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हमारे अतीत को प्रमाणिक रूप से जानने में सहायक सिद्ध होते हैं।


अध्याय 1: इतिहास के स्रोत (Sources of History) – 50 महत्वपूर्ण MCQs

यहाँ अध्याय 1 के आधार पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर और व्याख्या सहित दिए गए हैं। ये प्रश्न यूपीएससी और अन्य परीक्षाओं के लिए उपयोगी होंगे।

1. इतिहास का प्राथमिक स्रोत (Primary Source) कौन सा है?
(A) मुद्राएँ
(B) समाचार पत्र
(C) जीवनी
(D) नाटक

उत्तर: (A) मुद्राएँ
व्याख्या: मुद्राएँ तत्कालीन काल की प्रत्यक्ष गवाही होती हैं और हमें समकालीन आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थिति की जानकारी देती हैं।

2. सबसे पुराना भारतीय ग्रंथ कौन सा माना जाता है?
(A) महाभारत
(B) रामायण
(C) ऋग्वेद
(D) अर्थशास्त्र

उत्तर: (C) ऋग्वेद
व्याख्या: ऋग्वेद भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना साहित्यिक ग्रंथ है, जो वैदिक काल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

3. किस स्रोत से हमें सबसे पुरानी लिपियों की जानकारी मिलती है?
(A) अभिलेख
(B) साहित्यिक ग्रंथ
(C) यात्रा वृत्तांत
(D) पुराण

उत्तर: (A) अभिलेख
व्याख्या: अभिलेख (Inscriptions) पत्थर, धातु और अन्य कठोर सतहों पर लिखे गए होते थे, जिससे हमें तत्कालीन प्रशासन, राजव्यवस्था और घटनाओं की जानकारी मिलती है।

4. निम्नलिखित में से कौन सा पुरातात्विक स्रोत नहीं है?
(A) सिक्के
(B) ताम्रपत्र
(C) अभिलेख
(D) पंचतंत्र

उत्तर: (D) पंचतंत्र
व्याख्या: पंचतंत्र एक साहित्यिक ग्रंथ है, जबकि अन्य तीन भौतिक अवशेष (Archaeological Remains) हैं।

5. ‘इंडिका’ ग्रंथ किसने लिखा था?
(A) प्लिनी
(B) टॉलेमी
(C) मेगस्थनीज
(D) हेरोडोटस

उत्तर: (C) मेगस्थनीज
व्याख्या: मेगस्थनीज यूनानी राजदूत थे, जो मौर्यकाल में भारत आए और उन्होंने “इंडिका” नामक ग्रंथ लिखा।

6. किस स्रोत से हमें मौर्यकालीन प्रशासन की जानकारी मिलती है?
(A) अर्थशास्त्र
(B) मनुस्मृति
(C) महाभाष्य
(D) रामायण

उत्तर: (A) अर्थशास्त्र
व्याख्या: चाणक्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र मौर्यकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और राजनीति का विस्तृत वर्णन करता है।

7. भारत में सबसे पुराना ऐतिहासिक अभिलेख कौन सा है?
(A) प्रयाग प्रशस्ति
(B) अशोक के शिलालेख
(C) हाथीगुम्फा अभिलेख
(D) एरण अभिलेख

उत्तर: (B) अशोक के शिलालेख
व्याख्या: सम्राट अशोक के शिलालेख भारत के सबसे पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों में से एक हैं, जो ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में लिखे गए हैं।

8. ‘राजतरंगिणी’ किसने लिखी थी?
(A) हर्ष
(B) काल्हण
(C) विष्णुगुप्त
(D) पाणिनि

उत्तर: (B) काल्हण
व्याख्या: राजतरंगिणी 12वीं शताब्दी में काल्हण द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है, जो कश्मीर के इतिहास का वर्णन करता है।

9. ‘तहकीक-ए-हिंद’ नामक पुस्तक किसने लिखी?
(A) इब्न बतूता
(B) अल-बरूनी
(C) अबुल फजल
(D) मिन्हाज-उस-सिराज

उत्तर: (B) अल-बरूनी
व्याख्या: अल-बरूनी ने भारत के समाज, धर्म, खगोल विज्ञान और गणित पर ‘तहकीक-ए-हिंद’ नामक ग्रंथ लिखा।

10. नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में किस यात्री ने विस्तृत विवरण दिया?
(A) ह्वेनसांग
(B) फाह्यान
(C) इब्न बतूता
(D) मार्को पोलो

उत्तर: (A) ह्वेनसांग
व्याख्या: ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की और नालंदा विश्वविद्यालय का विस्तृत विवरण दिया।

11. मेगस्थनीज किसके दरबार में राजदूत थे?
(A) बिंदुसार
(B) अशोक
(C) चंद्रगुप्त मौर्य
(D) समुद्रगुप्त

उत्तर: (C) चंद्रगुप्त मौर्य
व्याख्या: मेगस्थनीज यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर के राजदूत थे, जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए और उन्होंने इंडिका नामक पुस्तक लिखी।

12. मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को कितने वर्गों में बाँटा था?
(A) चार
(B) पाँच
(C) सात
(D) दस

उत्तर: (C) सात
व्याख्या: मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को सात वर्गों में विभाजित किया था: दार्शनिक, कृषक, गड़ेरिए, शिल्पकार, सैनिक, पर्यवेक्षक और राजकीय सेवक।

13. निम्नलिखित में से कौन सा ग्रीक यात्री था?
(A) प्लिनी
(B) फाह्यान
(C) मार्को पोलो
(D) इब्न बतूता

उत्तर: (A) प्लिनी
व्याख्या: प्लिनी एक रोमन विद्वान थे, जिन्होंने भारत के व्यापार और प्राकृतिक संपत्तियों का वर्णन किया है।

14. पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी (Periplus of the Erythraean Sea) किस विषय पर केंद्रित है?
(A) भारतीय समाज
(B) भारतीय व्यापार
(C) भारतीय धर्म
(D) भारतीय प्रशासन

उत्तर: (B) भारतीय व्यापार
व्याख्या: यह ग्रंथ भारतीय व्यापार मार्गों और समुद्री व्यापार पर केंद्रित है और इसमें पश्चिमी तटीय नगरों की जानकारी दी गई है।

15. भारत आने वाला पहला चीनी यात्री कौन था?
(A) फाह्यान
(B) ह्वेनसांग
(C) इत्सिंग
(D) अल-बरूनी

उत्तर: (A) फाह्यान
व्याख्या: फाह्यान 5वीं शताब्दी में गुप्तकाल के दौरान भारत आए थे।

16. फाह्यान किस धर्म से जुड़े थे?
(A) हिंदू धर्म
(B) बौद्ध धर्म
(C) जैन धर्म
(D) इस्लाम

उत्तर: (B) बौद्ध धर्म
व्याख्या: फाह्यान एक बौद्ध भिक्षु थे, जिन्होंने भारत में बौद्ध धर्म के अध्ययन के लिए यात्रा की थी।

17. फाह्यान ने अपनी पुस्तक में किस राजा के शासनकाल का वर्णन किया है?
(A) समुद्रगुप्त
(B) विक्रमादित्य
(C) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
(D) अशोक

उत्तर: (C) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
व्याख्या: फाह्यान गुप्तकाल में आए थे और उन्होंने चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल का वर्णन किया है।

18. ह्वेनसांग भारत में किसके शासनकाल में आए थे?
(A) समुद्रगुप्त
(B) हर्षवर्धन
(C) चंद्रगुप्त मौर्य
(D) पृथ्वीराज चौहान

उत्तर: (B) हर्षवर्धन
व्याख्या: ह्वेनसांग 7वीं शताब्दी में हर्षवर्धन के शासनकाल में आए और उन्होंने सी-यू-की नामक ग्रंथ लिखा।

19. ह्वेनसांग ने भारत में कितने वर्ष बिताए?
(A) 5 वर्ष
(B) 10 वर्ष
(C) 15 वर्ष
(D) 20 वर्ष

उत्तर: (B) 10 वर्ष
व्याख्या: ह्वेनसांग ने भारत में लगभग 10 वर्ष बिताए और यहाँ के धार्मिक और शैक्षिक संस्थानों का गहन अध्ययन किया।

20. भारत में आने वाला पहला मुस्लिम यात्री कौन था?
(A) इब्न बतूता
(B) अल-बरूनी
(C) अबुल फजल
(D) मिन्हाज-उस-सिराज

उत्तर: (B) अल-बरूनी
व्याख्या: अल-बरूनी 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के साथ भारत आए और उन्होंने तहकीक-ए-हिंद नामक ग्रंथ लिखा।

21. ‘तहकीक-ए-हिंद’ किस विषय पर आधारित है?
(A) भारतीय प्रशासन
(B) भारतीय समाज और विज्ञान
(C) भारतीय धर्म
(D) भारतीय कला

उत्तर: (B) भारतीय समाज और विज्ञान
व्याख्या: अल-बरूनी ने भारतीय धर्म, समाज, गणित, खगोल विज्ञान और परंपराओं का विस्तृत अध्ययन किया।

22. इब्न बतूता किस देश से था?
(A) ईरान
(B) इराक
(C) मोरक्को
(D) तुर्की

उत्तर: (C) मोरक्को
व्याख्या: इब्न बतूता एक मोरक्कन यात्री थे, जिन्होंने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत यात्रा की।

23. इब्न बतूता ने भारत में कितने वर्ष बिताए?
(A) 5 वर्ष
(B) 7 वर्ष
(C) 10 वर्ष
(D) 12 वर्ष

उत्तर: (B) 7 वर्ष
व्याख्या: इब्न बतूता भारत में 7 वर्षों तक रहे और उन्होंने रिहला नामक ग्रंथ लिखा।

24. मार्को पोलो किस देश से संबंधित थे?
(A) इटली
(B) फ्रांस
(C) ग्रीस
(D) स्पेन

उत्तर: (A) इटली
व्याख्या: मार्को पोलो इटली के वेनिस शहर से थे और उन्होंने दक्षिण भारत के पांड्य राजवंश का वर्णन किया।

25. किस यात्री ने विजयनगर साम्राज्य का वर्णन किया था?
(A) मार्को पोलो
(B) अब्दुर रज्जाक
(C) इब्न बतूता
(D) ह्वेनसांग

उत्तर: (B) अब्दुर रज्जाक
व्याख्या: अब्दुर रज्जाक फारसी यात्री थे, जिन्होंने विजयनगर साम्राज्य की समृद्धि का वर्णन किया।

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