उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था और पुलिस प्रशासन: ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक गाइड - UP Polity & Police Administration Guide

उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था एवं पुलिस प्रशासन: एक संपूर्ण ऐतिहासिक और प्रशासनिक गाइड

लेखक नोट (Author Expertise & E-E-A-T): यह विस्तृत लेख उत्तर प्रदेश सिविल सेवा परीक्षाओं (UPPSC, RO/ARO, UP Police) के नवीनतम पाठ्यक्रम, आधिकारिक सरकारी प्रतिवेदनों और प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों के गहन विश्लेषण के आधार पर तैयार किया गया है। यह राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को समझने के लिए एक वन-स्टॉप प्रामाणिक गाइड है।


लेख के मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

यदि आपके पास समय कम है, तो इस पूरे लेख का त्वरित सारांश नीचे देख सकते हैं:

  • संवैधानिक ढांचा: यूपी की राजव्यवस्था संविधान के भाग-6 (अनुच्छेद 152-237) के तहत संचालित होती है।
  • प्रथम महिला राज्यपाल: श्रीमती सरोजिनी नायडू (स्वतंत्र भारत की भी पहली महिला राज्यपाल)।
  • प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री: चौधरी चरण सिंह (भारत रत्न से सम्मानित)।
  • सर्वाधिक मुख्यमंत्री कार्यकाल: बहन कुमारी मायावती (कुल 4 बार)।
  • विधायिका संरचना: द्विसदनात्मक (403 विधानसभा सीटें + 100 विधानपरिषद सीटें)।
  • पुलिस कमिश्नरेट: यूपी के 7 बड़े महानगरों में लागू, पहली महिला पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह बनीं।

भूमिका

भारतीय संविधान के तहत देश की शासन प्रणाली को लोकतांत्रिक और संसदीय ढांचे (Parliamentary System) के अंतर्गत संचालित किया जाता है। यह संसदीय व्यवस्था केवल केंद्र स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्यों के स्तर पर भी समान रूप से प्रभावी होती है। यदि हम भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें, तो इसकी राजव्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और विविधता से भरा रहा है।

भारतीय संविधान का भाग-6 (अनुच्छेद 152 से 237) विशेष रूप से राज्यों के शासन and प्रशासन से संबंधित प्रावधानों को परिभाषित करता है। संविधान के अनुसार, उत्तर प्रदेश की शासन प्रणाली के तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. कार्यपालिका (Executive)
  2. विधायिका/विधानमण्डल (Legislature)
  3. न्यायपालिका (Judiciary)

आइए, उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उत्तर प्रदेश की कार्यपालिका, मुख्यमंत्री इतिहास, विधानमण्डल और पुलिस प्रशासन के एक-एक बिंदु का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।


भाग 1: राज्य की कार्यपालिका (The Executive)

संवैधानिक प्रावधान: भाग-6, अनुच्छेद 152 से 167

राज्य की कार्यपालिका का मुख्य कार्य कानून और नीतियों को धरातल पर क्रियान्वित करना है। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और महाधिवक्ता (Advocate General) शामिल होते हैं।

1. राज्यपाल (The Governor) एवं ऐतिहासिक राजभवन

  • राजभवन (लखनऊ) का इतिहास: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का आधिकारिक निवास ‘राजभवन’ लखनऊ में स्थित है। इसका निर्माण 18वीं शताब्दी के अंत में अवध के नवाब सआदत अली खान के समय शुरू हुआ था।
  • मूल नाम व वास्तुकला: इस ऐतिहासिक भवन का मूल नाम ‘कोठी हयात बख्श’ था। इसके प्रमुख वास्तुकार (Architect) मेजर जनरल क्लाड मार्टिन थे। यह भवन इंडो-यूरोपीय शैली (Indo-European Style) के मिश्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल यहाँ निवास करती हैं।

उत्तर प्रदेश के राज्यपालों का ऐतिहासिक सफ़र:

  • श्रीमती सरोजिनी नायडू (15 अगस्त 1947 – 2 मार्च 1949): यह उत्तर प्रदेश की प्रथम राज्यपाल होने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल भी थीं।
  • श्री एच.पी. मोदी (होमी पेरोशा मोदी) (2 मई 1949 – 1 जून 1952): इनके कार्यकाल के दौरान ही राज्य का नाम ‘संयुक्त प्रांत’ (United Provinces) से परिवर्तित होकर ‘उत्तर प्रदेश’ हुआ था।
  • श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (K.M. Munshi): ये उत्तर प्रदेश के द्वितीय पूर्णकालिक राज्यपाल थे।
  • वराह वेंकट गिरी (वी.वी. गिरी) (10 जून 1957 – 30 जून 1960): ये उत्तर प्रदेश के एकमात्र ऐसे राज्यपाल रहे, जो बाद में चलकर देश के तीसरे उपराष्ट्रपति तथा चौथे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
  • मोहम्मद शफ़ी कुरैशी: ये उत्तर प्रदेश के दो बार कार्यवाहक राज्यपाल रहे हैं।

2. मुख्यमंत्री (Chief Minister) इतिहास और प्रमुख व्यक्तित्व

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का कालखंड भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला रहा है। आइए, क्रमवार तरीके से सभी प्रमुख मुख्यमंत्रियों के योगदानों को देखते हैं:

क) पंडित गोविंद वल्लभ पंत (प्रथम मुख्यमंत्री)

  • कार्यकाल: 17 जुलाई 1937 से 2 नवंबर 1939 (आज़ादी से पूर्व), 1 अप्रैल 1946 से 25 जनवरी 1950, 26 जनवरी 1950 से 20 मई 1952, और 25 मई 1952 से 27 दिसंबर 1954 तक।
  • ऐतिहासिक कार्य: इन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रसिद्ध काकोरी कांड (Kakori Train Action) के अभियुक्त क्रांतिकारियों का केस अदालत में लड़ा था।
  • राष्ट्रीय योगदान: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद, इन्होंने भारत के गृहमंत्री (Home Minister) के रूप में देश की सेवा की। इन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

ख) डॉ. सम्पूर्णानंद (द्वितीय मुख्यमंत्री)

  • कार्यकाल: 1954 से 1960 तक।
  • जीवन परिचय: इनका जन्म 1 जनवरी 1891 को वाराणसी में हुआ था। मुख्यमंत्री पद के बाद इन्होंने वर्ष 1962 से 1967 तक राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया था।

ग) श्री चन्द्रभान गुप्त

  • कार्यकाल: ये तीन अलग-अलग अवधियों में मुख्यमंत्री रहे—
    1. प्रथम कार्यकाल: 7 दिसंबर 1960 – 1 अक्टूबर 1963
    2. द्वितीय कार्यकाल: 14 मार्च 1967 – 2 अप्रैल 1967
    3. तृतीय कार्यकाल: 26 फरवरी 1969 – 17 फरवरी 1970
  • विशेषता: ये राज्य में सबसे कम समय तक (एक कार्यकाल के संदर्भ में) मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं।

घ) श्रीमती सुचेता कृपलानी

  • कार्यकाल: 1963 से 13 मार्च 1967 तक।
  • ऐतिहासिक गौरव: यह उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव रखती हैं।

ङ) चौधरी चरण सिंह (किसानों के मसीहा)

  • कार्यकाल: इनका प्रथम कार्यकाल 3 अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 तक था (भारतीय क्रांति दल और लोकदल पार्टी के माध्यम से)। इनका द्वितीय कार्यकाल 17 फरवरी 1970 से 1 अक्टूबर 1970 तक रहा।
  • ऐतिहासिक तथ्य: ये उत्तर प्रदेश के प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे। इनके हटने के बाद ही यूपी में प्रथम राष्ट्रपति शासन (25 फरवरी 1968 – 26 फरवरी 1969) लागू हुआ था।
  • प्रधानमंत्री पद व सम्मान: ये आगे चलकर देश के 5वें प्रधानमंत्री बने (28 जुलाई 1979 – 14 जनवरी 1980)। इनका जन्म 23 दिसंबर 1902 को नूरपुर (हापुड़) में हुआ था, जिसकी याद में हर वर्ष ‘किसान दिवस’ मनाया जाता है। इन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।

च) श्री कमलापति त्रिपाठी

  • कार्यकाल: 4 अप्रैल 1971 से 12 जून 1973 तक।
  • विशेष घटना: इनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 1973 में प्रसिद्ध PAC (Provincial Armed Constabulary) विद्रोह हुआ था। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्य में पुनः राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

छ) श्री नारायण दत्त तिवारी (N.D. Tiwari)

  • कार्यकाल: ये उत्तर प्रदेश के 3 बार मुख्यमंत्री बने—
    1. 1976 – 1977
    2. 1984 – 1985
    3. 1988 – 1989
  • अद्वितीय रिकॉर्ड: भारत के राजनीतिक इतिहास में नारायण दत्त तिवारी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने दो राज्यों—उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड (2000-2007)—के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया

ज) श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह)

  • कार्यकाल: 1980 से 1982 तक।
  • त्यागपत्र का कारण: इनके समय में कुख्यात बेहमई हत्याकांड हुआ था, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
  • राष्ट्रीय परिचय: इनका जन्म 25 जून 1931 को प्रयागराज में हुआ था तथा इन्हें मांडा के राजा बहादुर रामगोपाल सिंह द्वारा गोद लिया गया था। ये बाद में चलकर भारत के 7वें प्रधानमंत्री बने। इनका अवसान 27 नवंबर 2008 को हुआ।

झ) श्री कल्याण सिंह

  • कार्यकाल: ये दो बार मुख्यमंत्री रहे (1991-1992 और 1997-1999)।
  • ऐतिहासिक घटना: 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान इन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा दे दिया था।
  • राजनीतिक जीवन: ये बुलंदशहर और एटा लोकसभा सीटों से सांसद रहे। इन्होंने ‘राष्ट्रीय क्रांति पार्टी’ और ‘जन क्रांति पार्टी’ का भी गठन किया था, लेकिन बाद में पुनः भाजपा में शामिल हो गए। ये वर्ष 2014 से 2019 तक राजस्थान के राज्यपाल भी रहे।
  • जन्म व सम्मान: इनका जन्म 5 जनवरी 1932 को अतरौली (अलीगढ़) में हुआ था तथा इनका निधन 21 अगस्त 2021 को हुआ। इन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

ञ) श्री मुलायम सिंह यादव

  • कार्यकाल: ये तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने—
    1. प्रथम कार्यकाल (1989-1991): जनता दल के नेता के रूप में पहली बार मुख्यमंत्री बने।
    2. द्वितीय कार्यकाल (1993-1995): समाजवादी पार्टी के गठन के बाद गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया।
    3. तृतीय कार्यकाल (2003-2007)।
  • समाजवादी पार्टी की स्थापना: इन्होंने 14 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी (SP) की स्थापना की थी।
  • संसदीय अनुभव: ये 10 बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य (MLA) तथा 7 बार लोकसभा सांसद (MP) चुने गए थे।
  • रक्षा मंत्री व नीतिगत निर्णय: ये वर्ष 1996 से 1998 तक भारत के रक्षा मंत्री रहे। इन्हीं के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को 15% से बढ़ाकर 27% किया गया था।
  • जन्म व सम्मान: इनका जन्म 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई गाँव में हुआ था और निधन 10 अक्टूबर 2022 को हुआ। इन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाजा गया।

ट) बहन कुमारी मायावती

  • कार्यकाल: ये उत्तर प्रदेश में 4 अलग-अलग अवधियों में मुख्यमंत्री रहीं—
    1. प्रथम कार्यकाल: 3 जून 1995 – 18 अक्टूबर 1995 (भाजपा के बाहरी समर्थन से)।
    2. द्वितीय कार्यकाल: 21 मार्च 1997 – 20 सितंबर 1997 (गठबंधन की सरकार)।
    3. तृतीय कार्यकाल: 3 मई 2002 – 29 अगस्त 2003।
    4. चतुर्थ कार्यकाल: 13 मई 2007 – 15 मार्च 2012 (पूर्ण बहुमत की सरकार)।
  • रिकॉर्ड: इनका मूल स्थान बादलपुर गाँव (गौतम बुद्ध नगर) है और इनका जन्म 15 जनवरी 1956 को हुआ था। ये भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री हैं और उत्तर प्रदेश की सर्वाधिक 4 बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड इनके नाम है।

ठ) योगी आदित्यनाथ (वर्तमान मुख्यमंत्री)

  • मूल नाम व संगठन: इनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है और इनके गुरु का नाम महंत अवैधनाथ है। इन्होंने ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ संगठन का गठन किया था।
  • कार्यकाल:
    • प्रथम कार्यकाल: 19 मार्च 2017 – 25 मार्च 2022.
    • द्वितीय कार्यकाल: 25 मार्च 2022 से निरंतर (अब तक)।
  • संसदीय सफर: मुख्यमंत्री बनने से पूर्व ये गोरखपुर लोकसभा सीट से लगातार 5 बार (1998-2017) सांसद रहे। वर्ष 1998 में जब ये पहली बार चुनाव जीतकर आए, तब वे 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद थे।

3. महाधिवक्ता (Advocate General)

  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के महाधिवक्ता के पद को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। यह राज्य सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है।
  • पद की स्थापना: इस पद का प्रावधान पहली बार भारत शासन अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935) के तहत किया गया था।
  • प्रमुख व्यक्तित्व:
    • प्रथम महाधिवक्ता: डॉ. नारायण प्रसाद अस्थाना (1937-1945)।
    • श्री शांति भूषण: ये उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता रहे और बाद में चलकर देश के केंद्रीय कानून मंत्री बने।
    • वर्तमान महाधिवक्ता: श्री अजय कुमार मिश्र।

4. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule)

उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है।

  • प्रथम राष्ट्रपति शासन (25 फरवरी 1968 – 26 फरवरी 1969): यह चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली ‘संयुक्त विधायक दल’ (SVD) की गठबंधन सरकार गिरने के बाद लगा था। इसकी कुल अवधि 1 वर्ष 2 दिन थी। उस समय देश के राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन तथा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी. गोपाल रेड्डी थे।
  • दसवाँ (अंतिम) राष्ट्रपति शासन (18 मार्च 2002 – 3 मई 2002): वर्ष 2002 के विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राजनीतिक गतिरोध उत्पन्न हुआ था। इस समय उत्तर प्रदेश के राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री थे।

भाग 2: उत्तर प्रदेश का विधानमण्डल (The Legislature)

उत्तर प्रदेश का विधानमण्डल एक द्विसदनात्मक (Bicameral) व्यवस्था है, जो राज्यपाल, विधानपरिषद और विधानसभा से मिलकर बनती है।

            [ उत्तर प्रदेश विधानमण्डल ]
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▼                ▼                ▼
[ राज्यपाल ]   [ विधानपरिषद ]     [ विधानसभा ]

1. विधानपरिषद (Legislative Council – उच्च सदन)

  • स्थापना: भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत वर्ष 1937 में इसकी स्थापना की गई थी।
  • पहली बैठक: 29 जुलाई 1937 को इसकी प्रथम बैठक आयोजित हुई थी।
  • ऐतिहासिक पदाधिकारी: इसके प्रथम अध्यक्ष सर सीताराम थे तथा प्रथम उपाध्यक्ष बेगम एजाज रसूल थीं। स्थापना के समय इसमें सदस्यों की कुल संख्या 60 थी।
  • स्वतंत्रता के बाद: उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के पहले सभापति (First Chairman) श्री चन्द्रभाल सिंह बने।
  • वर्तमान स्थिति: वर्तमान में विधानपरिषद के सदस्यों की संख्या 100 है। इसके वर्तमान सभापति श्री कुंवर मानवेंद्र सिंह हैं।

2. विधानसभा (Legislative Assembly – निम्न सदन)

  • गठन: स्वतंत्रता के बाद विधानसभा का प्रथम गठन 8 मार्च 1952 को किया गया था।
  • प्रथम पदाधिकारी: इसके प्रथम अध्यक्ष (स्पीकर) राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन बने (इन्हें 1961 में भारत रत्न मिला) तथा प्रथम उपाध्यक्ष अब्दुल हकीम बने।
  • सीटों का गणित: वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन सीटों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
    • आरक्षित सीटें: कुल 86 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से SC (अनुसूचित जाति) के लिए 84 तथा ST (अनुसूचित जनजाति) के लिए 2 सीटें आरक्षित हैं।
    • *ST के लिए आरक्षित दोनों सीटें सोनभद्र जिले की ‘ओबरा’ और ‘दुद्धी’ विधानसभा सीटें हैं।
  • जनपदवार सीटें: सर्वाधिक विधानसभा सीटों वाला जिला प्रयागराज (12 सीटें) है। इसके बाद कानपुर नगर और आजमगढ़ में 10-10 सीटें हैं। सबसे कम विधानसभा सीटों वाले जिले ललितपुर, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर और श्रावस्ती हैं, जहाँ प्रत्येक जिले में मात्र 2-2 सीटें हैं।
  • 18वीं विधानसभा (वर्तमान): इसका गठन 11 मार्च 2022 को हुआ। इसके वर्तमान अध्यक्ष श्री सतीश महाना हैं।
  • महिला प्रतिनिधित्व का बढ़ता ग्राफ: विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है:
    • 15वीं विधानसभा: 23 महिलाएँ
    • 16वीं विधानसभा: 35 महिलाएँ
    • 17वीं विधानसभा: 42 महिलाएँ
    • 18वीं विधानसभा: 47 महिलाएँ
  • विशेष गौरव: श्री बनारसी दास एवं श्रीपति मिश्र उत्तर प्रदेश विधानसभा के ऐसे अध्यक्ष रहे हैं, जो बाद में चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने।
  • संसदीय प्रतिनिधित्व (केंद्र में): उत्तर प्रदेश से संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए 31 सीटें तथा निम्न सदन यानी लोकसभा के लिए 80 सीटें आवंटित हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं।

3. विधान भवन (Legislative Building) की वास्तुकला

  • शिलांन्यास: 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन गवर्नर सर स्पेंसर बटलर ने इस भव्य भवन की नींव रखी थी।
  • उद्घाटन: इसका उद्घाटन फरवरी 1928 में हुआ।
  • वास्तुकार व सामग्री: इसके मुख्य वास्तुकार स्विंटन जैकब और श्री हीरा सिंह थे। इसे बनाने में मुख्य रूप से चुनार के बलुआ पत्थरों (Chunar Sandstone) का उपयोग किया गया है।
  • शैली व विशेषता: यह भवन इण्डो-सारसोनिक स्थापत्य शैली (Indo-Saracenic Style) में निर्मित है। इस भवन के भीतर दो मुख्य कक्ष (विधानसभा और विधानपरिषद) हैं। इसके ‘पोट्रेट हॉल’ में उत्तर प्रदेश के महान नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों के तैलचित्र (Portraits) प्रदर्शित किए गए हैं।

भाग 3: पुलिस एवं कारागार प्रशासन (Police & Prison Administration)

उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए यहाँ की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का ज़िम्मा एक बेहद व्यवस्थित ढाँचे के कंधों पर है

1. स्थापना और संगठनात्मक ढांचा

  • कानूनी आधार: प्रदेश की वर्तमान पुलिस प्रणाली ‘पुलिस अधिनियम 1861’ (Police Act 1861) पर आधारित है। इसे वर्ष 1860 में H.M. कोर्ट की अध्यक्षता में गठित पुलिस अनुशंसाओं के आधार पर अधिनियमित किया गया था।
  • स्थापना व मुख्यालय: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्थापना वर्ष 1863 में हुई थी। इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है (इससे पूर्व इसका मुख्यालय प्रयागराज में हुआ करता था)।
  • शीर्ष पद: स्वतंत्रता के पश्चात् प्रदेश के पहले भारतीय पुलिस महानिरीक्षक (IGP) वी.एन. लाहिरी बने थे। वर्ष 1982 में राज्य में पुलिस महानदेशक (DGP) के सर्वोच्च पद का सृजन किया गया, जिसके प्रथम DGP नरेश कुमार बने। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण हैं।

2. भौगोलिक एवं प्रशासनिक विभाजन

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूरे प्रदेश (75 जिलों) को 8 जोनों (Zones) तथा 18 रेंजों (Ranges) में विभाजित किया गया है।

  • 8 पुलिस ज़ोन: प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, बरेली, आगरा तथा गोरखपुर।
    • प्रत्येक ज़ोन का नेतृत्व ADG (Additional Director General – अतिरिक्त पुलिस महानदेशक) स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाता है।
  • 18 पुलिस रेंज: प्रत्येक ज़ोन के अंतर्गत 2 से 3 पुलिस रेंज आते हैं और एक range न्यूनतम 2 से 3 जिलों को मिलाकर बनती है।
    • प्रत्येक रेंज का नेतृत्व IG (Inspector General of Police – पुलिस महानिरीक्षक) करता है।

पुलिस प्रशासनिक पदानुक्रम (Hierarchy):

राज्यजोनरेंजजिलासबडिवीजनसर्किलपुलिस थाना

3. पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Police Commissionerate System)

बढ़ते शहरीकरण और अपराध नियंत्रण को त्वरित करने के लिए उत्तर प्रदेश के बड़े महानगरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई है। इस प्रणाली के लागू होने पर जिला अधिकारी (DM) एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट के कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकार ‘पुलिस आयुक्त’ (Police Commissioner) को हस्तांतरित कर दिए जाते हैं। इस पद पर ADG स्तर के वरिष्ठ IPS अधिकारी की तैनाती होती है।

कमिश्नरेट प्रणाली का चरणबद्ध विस्तार:

  1. 13 जनवरी 2020: राज्य में पहली बार लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में यह प्रणाली लागू हुई।
  2. 26 मार्च 2021: कानपुर नगर और वाराणसी में शुरुआत हुई।
  3. 25 नवंबर 2022: आगरा, प्रयागराज और गाजियाबाद में भी इसे लागू कर दिया गया।
  • विशेष उपलब्धि: लक्ष्मी सिंह गौतम बुद्ध नगर (G.B. Nagar) की कमान संभालकर उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिस कमिश्नर बनीं।

4. पुलिस प्रशासन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण संस्थान एवं तथ्य

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुलिस अकादमी: यह मुरादाबाद में स्थित है। इसकी शुरुआत वर्ष 1901 में एक पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के रूप में हुई थी, जिसका वर्ष 1997 में नाम बदलकर डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुलिस अकादमी कर दिया गया।
  • प्रथम पुलिस संग्रहालय: उत्तर प्रदेश का पहला पुलिस म्यूज़ियम गाजियाबाद में स्थापित है।
  • सेंट्रल पुलिस यूनिवर्सिटी: देश की पहली सेंट्रल पुलिस यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा में स्थापित की जा रही है।
  • क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा पुलिस स्टेशन: फिरोज़ाबाद जिले का ‘नारखी पुलिस थाना’ क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पुलिस स्टेशन है।

भारत के इतिहास में वह एकमात्र मुख्यमंत्री कौन है जिसने दो राज्यों का कार्यभार संभाला?

उत्तर: श्री नारायण दत्त तिवारी (N.D. Tiwari) एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने दो राज्यों—उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड—के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था।

प्रश्न 3: उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिस कमिश्नर कौन हैं और उनकी तैनाती कहाँ हुई थी?
उत्तर: IPS लक्ष्मी सिंह उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिस कमिश्नर हैं और उन्हें गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) कमिश्नरेट की कमान सौंपी गई थी।

प्रश्न 4: उत्तर प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में कुल कितनी सीटें हैं और सर्वाधिक सीटें किस जिले में हैं?
उत्तर: उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, जिनमें सर्वाधिक 12 सीटें अकेले प्रयागराज जिले में आती हैं।

प्रश्न 5: उत्तर प्रदेश पुलिस का मुख्यालय कहाँ है और वर्तमान पुलिस प्रणाली किस अधिनियम पर टिकी है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश पुलिस का मुख्यालय लखनऊ में स्थित है (पहले यह प्रयागराज में था) और यह पूरी व्यवस्था ‘पुलिस अधिनियम 1861’ के वैधानिक ढांचे पर आधारित है।

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