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भारत के संविधान का निर्माण (Making of Indian Constitution in Hindi): कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव?

क्या आपने कभी सोचा है कि आज जिस संविधान के आधार पर भारत का हर कानून चलता है, वह आखिर बना कैसे?

अगर आज भारत में हर नागरिक को समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मतदान का अधिकार और न्याय पाने का अधिकार मिला है, तो इसके पीछे सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान का है। लेकिन यह संविधान एक-दो दिनों या कुछ महीनों में तैयार नहीं हुआ था।

इसके पीछे था वर्षों का स्वतंत्रता संग्राम, देशभक्तों का बलिदान, सैकड़ों नेताओं के विचार-विमर्श, हजारों सुझाव और लगभग तीन वर्षों तक चली ऐतिहासिक बहसें। हर अनुच्छेद पर घंटों चर्चा हुई, हर शब्द को सावधानी से चुना गया और तभी जाकर दुनिया का सबसे विस्तृत लोकतांत्रिक संविधान तैयार हुआ।

यही कारण है कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि नए भारत के सपनों, संघर्षों और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रमाण है।

यदि आप UPSC, UPPSC, SSC, Railway, Banking, NDA, CDS, CTET, UPSSSC PET या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो “भारत के संविधान का निर्माण” ऐसा विषय है जिससे हर साल प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए केवल तिथियाँ याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को समझना भी आवश्यक है।

इस लेख के पहले भाग में हम जानेंगे कि संविधान बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, संविधान सभा की मांग कैसे उठी, कैबिनेट मिशन क्या था और संविधान सभा की पहली ऐतिहासिक बैठक में क्या हुआ।


आखिर भारत को नए संविधान की जरूरत क्यों पड़ी?

कल्पना कीजिए कि कोई देश आज़ाद तो हो जाए, लेकिन उसके पास अपना कोई कानून ही न हो। ऐसी स्थिति में सरकार कैसे चलेगी? नागरिकों के अधिकार कौन तय करेगा? चुनाव कैसे होंगे? न्याय किस आधार पर मिलेगा?

स्वतंत्रता से पहले भारत का शासन ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार चलता था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण था भारत शासन अधिनियम, 1935। यह अधिनियम प्रशासन चलाने में उपयोगी जरूर था, लेकिन यह भारतीय जनता की इच्छाओं और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा नहीं करता था। अंतिम निर्णय लेने की शक्ति ब्रिटिश सरकार के हाथों में ही रहती थी।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय नेताओं ने महसूस किया कि यदि भारत को वास्तव में स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाना है, तो उसे अपना संविधान स्वयं बनाना होगा—ऐसा संविधान जो भारतीय जनता की आवाज़ को प्रतिबिंबित करे।

यहीं से संविधान निर्माण की यात्रा वास्तव में शुरू होती है।


संविधान सभा की मांग सबसे पहले किसने उठाई?

बहुत से विद्यार्थी यह मानते हैं कि संविधान सभा का विचार स्वतंत्रता मिलने के बाद आया था, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।

सबसे पहले 1934 में एम. एन. रॉय ने यह सुझाव दिया कि भारत का संविधान ब्रिटिश संसद नहीं, बल्कि भारतीय जनता द्वारा चुनी गई संविधान सभा बनाए।

उस समय यह विचार काफी क्रांतिकारी माना गया। धीरे-धीरे इस मांग को व्यापक समर्थन मिलने लगा।

1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी स्पष्ट घोषणा की कि भारत का संविधान केवल भारतीयों द्वारा चुनी गई संविधान सभा ही बनाएगी। इसके बाद संविधान सभा की मांग स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य बन गई।


कैबिनेट मिशन: वह योजना जिसने संविधान निर्माण का रास्ता खोला

साल 1946… द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था। ब्रिटेन आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुका था। दूसरी ओर भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने निर्णायक चरण में पहुँच चुका था।

ब्रिटिश सरकार समझ चुकी थी कि अब भारत पर अधिक समय तक शासन करना संभव नहीं है।

इसी पृष्ठभूमि में मार्च 1946 में ब्रिटेन ने तीन वरिष्ठ मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत भेजा। इसे इतिहास में कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है।

इस मिशन में शामिल थे—

  • लॉर्ड पेथिक लॉरेंस
  • सर स्टैफर्ड क्रिप्स
  • ए. वी. अलेक्जेंडर

इनका उद्देश्य केवल भारत आना नहीं था, बल्कि भारत के राजनीतिक भविष्य की रूपरेखा तैयार करना था।


कैबिनेट मिशन भारत क्यों आया था?

ब्रिटिश सरकार के सामने सबसे बड़ा प्रश्न था—भारत को सत्ता किस प्रकार सौंपी जाए ताकि भविष्य में राजनीतिक अस्थिरता न हो।

इसीलिए कैबिनेट मिशन ने कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए—

  • भारत के लिए संविधान बनाने की व्यवस्था करना।
  • संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव देना।
  • भारतीय नेताओं के बीच सहमति बनाना।
  • अंतरिम सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करना।
  • सत्ता हस्तांतरण की शांतिपूर्ण प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

यही योजना आगे चलकर भारतीय संविधान निर्माण की आधारशिला बनी।


संविधान सभा का गठन कैसे हुआ?

कैबिनेट मिशन की सिफारिशें स्वीकार होने के बाद जुलाई 1946 में संविधान सभा के लिए चुनाव कराए गए।

यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य जानना जरूरी है—

इन चुनावों में आम जनता ने सीधे मतदान नहीं किया था। संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से किया गया।

उस समय संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई।

इनमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों, मुख्य आयुक्त क्षेत्रों और देशी रियासतों को प्रतिनिधित्व दिया गया ताकि संविधान वास्तव में पूरे भारत की आवाज़ बन सके।


देश के विभाजन के बाद क्या बदला?

1947 में भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान एक अलग राष्ट्र बन गया।

इसके बाद संविधान सभा के कई सदस्य पाकिस्तान की संविधान सभा में चले गए। परिणामस्वरूप भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 रह गई।

यही 299 सदस्य आगे चलकर स्वतंत्र भारत का संविधान तैयार करने वाले प्रतिनिधि बने।


महिलाओं ने भी निभाई ऐतिहासिक भूमिका

अक्सर संविधान निर्माण की चर्चा में केवल कुछ बड़े नेताओं का नाम लिया जाता है, लेकिन इसमें महिलाओं का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण था।

संविधान सभा में लगभग 15 महिला सदस्य थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकार, समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावशाली सुझाव दिए।

हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, रेणुका राय और बेगम ऐज़ाज़ रसूल जैसी अनेक महिलाओं ने संविधान निर्माण में अमूल्य योगदान दिया।


9 दिसंबर 1946: जब इतिहास ने नया मोड़ लिया

9 दिसंबर 1946…

यह केवल एक तारीख नहीं थी, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की शुरुआत थी।

नई दिल्ली के संविधान भवन (वर्तमान संसद भवन के केंद्रीय कक्ष) में पहली बार संविधान सभा की बैठक आयोजित हुई। पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक क्षण पर टिकी थीं।

इस पहली बैठक में 207 सदस्य उपस्थित थे।

बैठक की अध्यक्षता संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्र भारत के भविष्य पर प्रेरणादायक विचार रखे।

दो दिन बाद, 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए। आगे चलकर उन्होंने संविधान निर्माण की पूरी प्रक्रिया का सफल नेतृत्व किया और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति भी बने।

क्यों थी यह बैठक इतनी महत्वपूर्ण?

यदि 15 अगस्त 1947 भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता का दिन था, तो 9 दिसंबर 1946 उस लोकतांत्रिक यात्रा की शुरुआत थी जिसने भारत को आधुनिक गणराज्य बनने की दिशा दी।

यहीं से वह प्रक्रिया शुरू हुई जिसने करोड़ों भारतीयों को समान अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूत नींव प्रदान की।

आगे के भाग में हम जानेंगे कि संविधान सभा ने उद्देश्य प्रस्ताव कैसे स्वीकार किया, प्रारूप समिति कैसे बनी, डॉ. भीमराव अंबेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष क्यों चुना गया और आखिर लगभग तीन वर्षों की कठिन मेहनत के बाद भारतीय संविधान कैसे तैयार हुआ।



भारत के संविधान का निर्माण (Part 2): उद्देश्य प्रस्ताव, संविधान निर्माण की प्रक्रिया, प्रमुख समितियाँ, प्रारूप समिति और डॉ. भीमराव अंबेडकर की ऐतिहासिक भूमिका

अब शुरू हुआ भारत के भविष्य को लिखने का सबसे बड़ा अभियान

9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक के साथ भारत ने लोकतंत्र की ओर अपना पहला औपचारिक कदम बढ़ा दिया था। लेकिन असली चुनौती अब शुरू होने वाली थी।

देश को केवल स्वतंत्र कराना ही पर्याप्त नहीं था, बल्कि एक ऐसा संविधान तैयार करना था जो करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों, विविधताओं और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को एक सूत्र में बाँध सके।

कल्पना कीजिए कि एक ऐसे देश के लिए संविधान बनाया जा रहा है जहाँ सैकड़ों भाषाएँ, अनेक धर्म, अलग-अलग संस्कृतियाँ और विशाल भौगोलिक विविधता मौजूद हो। ऐसा संविधान बनाना दुनिया के सबसे कठिन कार्यों में से एक था।

इसीलिए संविधान सभा ने जल्दबाज़ी करने के बजाय हर विषय पर गहन चर्चा, विशेषज्ञों की राय और विभिन्न समितियों के माध्यम से एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई।


उद्देश्य प्रस्ताव: स्वतंत्र भारत के सपनों की पहली झलक

संविधान निर्माण की दिशा तय करने वाला पहला बड़ा कदम उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution) था।

उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत किया गया?

13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस प्रस्ताव में उस भारत की कल्पना की गई थी जो—

  • पूर्णतः स्वतंत्र और संप्रभु होगा।
  • लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित होगा।
  • सभी नागरिकों को समान अधिकार देगा।
  • सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करेगा।
  • राज्यों का एक मजबूत संघ होगा।
  • विश्व शांति और मानव कल्याण में योगदान देगा।

लंबी चर्चा के बाद 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

यही उद्देश्य प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।


संविधान निर्माण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी?

उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद संविधान सभा ने महसूस किया कि इतने विशाल विषय पर एक साथ काम करना संभव नहीं है।

इसलिए अलग-अलग विषयों के लिए विशेष समितियाँ बनाई गईं। प्रत्येक समिति को एक निश्चित जिम्मेदारी सौंपी गई।

उदाहरण के लिए—

  • किसी समिति को मौलिक अधिकारों पर काम करना था।
  • किसी को राज्यों की शक्तियों पर।
  • किसी को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर।
  • किसी को संविधान का प्रारूप तैयार करना था।

इसी व्यवस्थित कार्यप्रणाली ने भारतीय संविधान को इतना संतुलित और व्यापक बनाया।


संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ

संविधान सभा में कुल मिलाकर अनेक समितियाँ बनाई गईं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से निम्न समितियाँ सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

1. प्रारूप समिति (Drafting Committee)

यह संविधान निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण समिति थी।

गठन: 29 अगस्त 1947

अध्यक्ष: डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर

इस समिति का कार्य विभिन्न समितियों की सिफारिशों को एक व्यवस्थित कानूनी दस्तावेज का रूप देना था।


2. संघ शक्ति समिति (Union Powers Committee)

अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू

इस समिति ने केंद्र सरकार की शक्तियों और अधिकारों का निर्धारण किया।


3. संघ संविधान समिति (Union Constitution Committee)

अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू

इस समिति ने संघीय ढाँचे तथा केंद्र और राज्यों के संबंधों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


4. प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Constitution Committee)

अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल

इस समिति ने प्रांतों के प्रशासन और शासन व्यवस्था का प्रारूप तैयार किया।


5. परामर्श समिति (Advisory Committee)

अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल

यह समिति मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों, जनजातीय क्षेत्रों तथा नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े विषयों पर कार्य करती थी।


6. नियम समिति (Rules Committee)

अध्यक्ष: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

इस समिति ने संविधान सभा की कार्यवाही और नियमों को निर्धारित किया।


7. संचालन समिति (Steering Committee)

अध्यक्ष: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

यह समिति संविधान सभा की बैठकों का संचालन और कार्यसूची तय करती थी।


प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन

जैसे-जैसे विभिन्न समितियाँ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती गईं, उन्हें एक व्यवस्थित और कानूनी रूप देना आवश्यक हो गया।

इसी उद्देश्य से 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति का गठन किया गया।

इस समिति में सात सदस्य शामिल थे।

इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य था—

  • विभिन्न समितियों की रिपोर्ट का अध्ययन करना।
  • संविधान का प्रारंभिक मसौदा तैयार करना।
  • कानूनी भाषा को स्पष्ट और सटीक बनाना।
  • प्राप्त सुझावों के आधार पर संशोधन करना।
  • अंतिम संविधान का प्रारूप तैयार करना।

यही कारण है कि प्रारूप समिति को संविधान निर्माण की “हृदयस्थ समिति” भी कहा जाता है।


प्रारूप समिति के सदस्य

प्रारूप समिति में निम्न प्रमुख सदस्य शामिल थे—

  • डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर (अध्यक्ष)
  • एन. गोपालस्वामी अयंगार
  • अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
  • के. एम. मुंशी
  • सैयद मोहम्मद सादुल्ला
  • बी. एल. मित्तर (बाद में एन. माधव राव)
  • डी. पी. खेतान (बाद में टी. टी. कृष्णमाचारी)

इन सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता के आधार पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।


डॉ. भीमराव अंबेडकर को ही अध्यक्ष क्यों चुना गया?

यह प्रश्न लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूछा जाता है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक महान समाज सुधारक ही नहीं थे, बल्कि वे विश्वस्तरीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और संवैधानिक विशेषज्ञ भी थे।

उन्होंने—

  • कोलंबिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
  • लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्ययन किया।
  • कानून और संविधान का गहन अध्ययन किया।
  • सामाजिक न्याय और समानता के पक्ष में निरंतर कार्य किया।

उनकी असाधारण कानूनी समझ और विश्लेषण क्षमता को देखते हुए उन्हें प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया।


क्या डॉ. अंबेडकर ने अकेले संविधान लिखा था?

यह एक सामान्य भ्रम है।

वास्तव में भारतीय संविधान किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिखा गया था।

संविधान निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया थी जिसमें संविधान सभा के सभी सदस्यों, विभिन्न समितियों, संवैधानिक सलाहकारों और विशेषज्ञों का योगदान था।

हालाँकि, इन सभी विचारों को एक सुव्यवस्थित, तार्किक और कानूनी दस्तावेज का रूप देने में डॉ. अंबेडकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही।

इसी कारण उन्हें “भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार (Chief Architect of the Indian Constitution)” कहा जाता है।


संविधान सभा में कैसे होती थी चर्चा?

संविधान सभा केवल औपचारिक बैठकें नहीं करती थी।

प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तार से चर्चा होती थी।

सदस्य अपने सुझाव रखते थे।

यदि किसी प्रावधान पर असहमति होती थी तो उस पर पुनः विचार किया जाता था।

हजारों संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से अनेक स्वीकार भी किए गए।

यही कारण है कि भारतीय संविधान लोकतांत्रिक विमर्श का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।


संविधान सलाहकार की भूमिका

संविधान निर्माण में सर बेनगल नरसिंह राव (बी. एन. राव) का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण था।

उन्हें संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार (Constitutional Adviser) नियुक्त किया गया था।

उन्होंने—

  • विश्व के विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन किया।
  • प्रारंभिक मसौदा तैयार करने में सहायता की।
  • संवैधानिक प्रावधानों पर विशेषज्ञ सलाह दी।
  • प्रारूप समिति को तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार कौन थे—इसका उत्तर है बी. एन. राव


क्या संविधान निर्माण आसान था?

बिलकुल नहीं।

उस समय भारत विभाजन की त्रासदी, शरणार्थी संकट, सांप्रदायिक हिंसा और रियासतों के एकीकरण जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था।

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद संविधान सभा ने अपना कार्य जारी रखा।

यही कारण है कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लोकतंत्र के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक भी है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्नउत्तर
उद्देश्य प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया?पंडित जवाहरलाल नेहरू
उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत हुआ?13 दिसंबर 1946
उद्देश्य प्रस्ताव कब स्वीकार हुआ?22 जनवरी 1947
प्रारूप समिति का गठन29 अगस्त 1947
प्रारूप समिति के अध्यक्षडॉ. बी. आर. अंबेडकर
संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकारबी. एन. राव
संघ शक्ति समिति के अध्यक्षजवाहरलाल नेहरू
परामर्श समिति के अध्यक्षसरदार वल्लभभाई पटेल
नियम समिति के अध्यक्षडॉ. राजेन्द्र प्रसाद

आगे क्या पढ़ेंगे?

अगले भाग में हम जानेंगे कि संविधान तैयार होने में कितना समय लगा, कितनी बैठकें हुईं, कितना खर्च आया, भारतीय संविधान ने किन-किन देशों से क्या-क्या अपनाया, 26 नवंबर और 26 जनवरी का महत्व क्या है, तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को विस्तार से समझेंगे।



भारत के संविधान का निर्माण (Part 3): समयरेखा, विदेशी स्रोत, भारतीय संविधान की विशेषताएँ और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान सभा की पहली बैठक हो चुकी थी। विभिन्न समितियाँ अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर रही थीं। प्रारूप समिति पूरे समर्पण के साथ संविधान का मसौदा तैयार कर रही थी। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान को तैयार करने में आखिर कितना समय लगा?

यह काम इतना आसान नहीं था। संविधान सभा के सामने केवल कानून लिखने की चुनौती नहीं थी, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की नींव रखने की जिम्मेदारी थी, जो सदियों की गुलामी से निकलकर एक आधुनिक, लोकतांत्रिक और समावेशी भारत बनने जा रहा था।

यही कारण है कि संविधान निर्माण की पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी, गहन विचार-विमर्श और व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए पूरी की गई।


भारतीय संविधान निर्माण की पूरी समयरेखा (Timeline)

भारत के संविधान के निर्माण को समझने का सबसे आसान तरीका इसकी समयरेखा को जानना है। यह लगभग तीन वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा थी।

तिथिप्रमुख घटना
16 मई 1946कैबिनेट मिशन योजना की घोषणा
जुलाई 1946संविधान सभा के चुनाव सम्पन्न
9 दिसंबर 1946संविधान सभा की पहली बैठक
11 दिसंबर 1946डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए
13 दिसंबर 1946जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया
22 जनवरी 1947उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार किया गया
29 अगस्त 1947प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन
फरवरी 1948संविधान का पहला प्रारूप (Draft Constitution) प्रकाशित
4 नवंबर 1948प्रारूप संविधान संविधान सभा में प्रस्तुत
26 नवंबर 1949संविधान अंगीकृत (Adopt), अधिनियमित (Enact) एवं आत्मार्पित (Give to Ourselves) किया गया
24 जनवरी 1950संविधान सभा के सदस्यों ने अंतिम हस्ताक्षर किए
26 जनवरी 1950संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ; भारत गणराज्य बना

संविधान निर्माण में कितना समय लगा?

यह प्रतियोगी परीक्षाओं का सबसे लोकप्रिय प्रश्न है।

भारतीय संविधान के निर्माण में—

  • 2 वर्ष
  • 11 महीने
  • 18 दिन

का समय लगा।

इस दौरान संविधान सभा ने गहन विचार-विमर्श के बाद प्रत्येक अनुच्छेद और प्रावधान को अंतिम रूप दिया।


संविधान सभा की कितनी बैठकें हुईं?

संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा ने कुल—

  • 11 सत्र (Sessions)
  • 165 बैठक दिवस (Sitting Days)

आयोजित किए।

इनमें से लगभग 114 दिनों तक केवल संविधान के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा हुई।

हर अनुच्छेद पर बहस हुई, संशोधन प्रस्ताव आए और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिए गए। यही भारतीय संविधान की सबसे बड़ी ताकत है।


संविधान निर्माण पर कितना खर्च आया?

संविधान निर्माण में लगभग ₹63.96 लाख (उस समय के मूल्य के अनुसार) खर्च हुए।

आज की तुलना में यह राशि बहुत कम प्रतीत हो सकती है, लेकिन उस समय यह एक बड़ी राशि थी। फिर भी इसे भारत के भविष्य में किया गया एक ऐतिहासिक निवेश माना जाता है।


भारतीय संविधान की मूल संरचना

जब संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, तब इसमें—

  • 22 भाग (Parts)
  • 395 अनुच्छेद (Articles)
  • 8 अनुसूचियाँ (Schedules)

शामिल थीं।

समय के साथ कई संशोधनों के कारण आज संविधान में—

  • 25 भाग
  • 448 अनुच्छेद (क्रमांकन सहित)
  • 12 अनुसूचियाँ

हैं।

परीक्षा टिप: यदि प्रश्न में “मूल संविधान” पूछा जाए, तो उत्तर होगा—395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ।


भारतीय संविधान किन देशों से प्रेरित है?

अक्सर कहा जाता है कि भारतीय संविधान कई देशों के श्रेष्ठ संवैधानिक विचारों का सुंदर समन्वय है। संविधान निर्माताओं ने किसी भी व्यवस्था की अंधाधुंध नकल नहीं की, बल्कि विभिन्न देशों की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें अपनाया।

1. ब्रिटेन (United Kingdom)

भारत ने ब्रिटेन से अपनाए—

  • संसदीय शासन प्रणाली
  • मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व
  • प्रधानमंत्री की व्यवस्था
  • विधि का शासन (Rule of Law)
  • एकल नागरिकता
  • संसद की कार्यप्रणाली

2. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

अमेरिका से लिए गए प्रमुख प्रावधान—

  • मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
  • न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)
  • स्वतंत्र न्यायपालिका
  • राष्ट्रपति पर महाभियोग
  • सर्वोच्च न्यायालय की संरचना

3. आयरलैंड

  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy)
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन की कुछ अवधारणाएँ

4. कनाडा

  • मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था
  • अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र को

5. ऑस्ट्रेलिया

  • समवर्ती सूची (Concurrent List)
  • व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता
  • संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक

6. जर्मनी (वाइमर संविधान)

  • आपातकालीन प्रावधान

7. सोवियत संघ (पूर्व USSR)

  • मौलिक कर्तव्य (बाद में 42वें संशोधन, 1976 द्वारा)
  • सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की अवधारणा

8. दक्षिण अफ्रीका

  • संविधान संशोधन की प्रक्रिया
  • राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की व्यवस्था

9. जापान

  • “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” (Procedure Established by Law)

क्या भारतीय संविधान केवल विदेशी संविधानों की नकल है?

यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।

भारतीय संविधान ने विभिन्न देशों से उपयोगी प्रावधान अवश्य लिए, लेकिन उन्हें भारतीय समाज, संस्कृति, प्रशासनिक आवश्यकताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप ढाला गया।

यही कारण है कि भारतीय संविधान को “उधार लिया गया संविधान” नहीं, बल्कि “विश्व के श्रेष्ठ संवैधानिक अनुभवों और भारतीय परिस्थितियों का अद्वितीय समन्वय” कहा जाता है।


भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय संविधान की कुछ विशेषताएँ इसे विश्व के अन्य संविधानों से अलग बनाती हैं।

विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित राष्ट्रीय संविधान है।

संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य

भारत की राजनीतिक पहचान संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से व्यक्त की गई है।

संसदीय शासन प्रणाली

भारत में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि वास्तविक कार्यपालिका प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद होती है।

संघीय व्यवस्था, लेकिन मजबूत केंद्र

भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है, लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए केंद्र को पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं।

स्वतंत्र न्यायपालिका

न्यायपालिका को कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र रखा गया है ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य

संविधान नागरिकों को अधिकार भी देता है और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध भी कराता है।

एकल नागरिकता

संघीय व्यवस्था होने के बावजूद भारत में केवल एक ही नागरिकता है।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

प्रत्येक योग्य नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार प्राप्त है।


26 नवंबर और 26 जनवरी का महत्व

कई विद्यार्थी इन दोनों तिथियों में भ्रमित हो जाते हैं।

26 नवंबर 1949

इस दिन संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।

इसी कारण प्रतिवर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस (Constitution Day) मनाया जाता है।

26 जनवरी 1950

इस दिन भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और भारत आधिकारिक रूप से गणराज्य (Republic) बन गया।

26 जनवरी की तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 1930 के पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव की ऐतिहासिक स्मृति इससे जुड़ी हुई थी।


क्या आप जानते हैं?

  • संविधान की मूल प्रति हाथ से लिखी गई थी।
  • इसे प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने सुंदर कैलिग्राफी में लिखा।
  • मूल संविधान में टाइपिंग नहीं की गई थी।
  • इसकी सजावट शांतिनिकेतन के कलाकारों ने भारतीय संस्कृति की झलक के साथ की थी।
  • मूल प्रति हीलियम गैस से सुरक्षित विशेष कक्ष में संरक्षित है।

परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्नउत्तर
संविधान निर्माण में लगा समय2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन
कुल बैठक दिवस165
संविधान पर चर्चा114 दिन
संविधान लागू26 जनवरी 1950
संविधान अंगीकृत26 नवंबर 1949
मूल संविधान395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ
वर्तमान संविधान448 अनुच्छेद (क्रमांकन सहित), 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ
संविधान दिवस26 नवंबर
गणतंत्र दिवस26 जनवरी
संविधान की हस्तलिपिप्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा

आगे क्या पढ़ेंगे?

अंतिम भाग में हम UPSC, UPPSC, SSC, Railway, PET एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs), Frequently Asked Questions (FAQs), Quick Revision Notes, One-Liner Facts और Last Minute Exam Revision को विस्तार से समझेंगे।



भारत के संविधान का निर्माण (Part 4): FAQs, PYQs, One-Liners, Quick Revision और Exam Booster Notes

अब तक आपने क्या सीखा?

यदि आपने इस लेख के पहले तीन भाग पढ़ लिए हैं, तो अब आप भारतीय संविधान के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को समझ चुके हैं—संविधान सभा की मांग से लेकर संविधान लागू होने तक की ऐतिहासिक यात्रा।

लेकिन किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता केवल पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि सही समय पर सही रिवीजन करने से मिलती है।

इसी उद्देश्य से इस अंतिम भाग में हमने उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को एक स्थान पर संकलित किया है, जो UPSC, UPPSC, SSC, Railway, Banking, NDA, CDS, CTET, State PCS, UPSSSC PET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।


Frequently Asked Questions (FAQs)

1. भारतीय संविधान का निर्माण कब शुरू हुआ?

भारतीय संविधान निर्माण की प्रक्रिया संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 से प्रारंभ हुई।


2. भारतीय संविधान का निर्माण कब पूरा हुआ?

संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया।


3. भारतीय संविधान कब लागू हुआ?

भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू हुआ। इसी दिन भारत एक संपूर्ण गणराज्य बना।


4. भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा?

भारतीय संविधान के निर्माण में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे।


5. संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे?

संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।


6. संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष कौन थे?

संविधान सभा की पहली बैठक की अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी।


7. प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर थे।


8. भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार किसे कहा जाता है?

डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार (Chief Architect of the Indian Constitution) कहा जाता है।


9. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या कितनी थी?

प्रारंभ में संविधान सभा में 389 सदस्य थे। विभाजन के बाद यह संख्या घटकर 299 रह गई।


10. भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान क्यों कहलाता है?

क्योंकि इसमें शासन व्यवस्था, नागरिक अधिकारों, न्यायपालिका, चुनाव, केंद्र-राज्य संबंध, आपातकाल, वित्त, अनुसूचियाँ तथा अनेक प्रशासनिक विषयों का अत्यंत विस्तृत विवरण दिया गया है।


प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

प्रश्न 1

भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

(A) जवाहरलाल नेहरू

(B) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

(C) डॉ. भीमराव अंबेडकर ✅

(D) सरदार पटेल


प्रश्न 2

संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?

(A) 15 अगस्त 1947

(B) 9 दिसंबर 1946 ✅

(C) 26 जनवरी 1950

(D) 26 नवंबर 1949


प्रश्न 3

उद्देश्य प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था?

(A) सरदार पटेल

(B) महात्मा गांधी

(C) जवाहरलाल नेहरू ✅

(D) डॉ. अंबेडकर


प्रश्न 4

भारतीय संविधान को कब अंगीकृत किया गया?

(A) 15 अगस्त 1947

(B) 26 जनवरी 1950

(C) 26 नवंबर 1949 ✅

(D) 9 दिसंबर 1946


प्रश्न 5

भारतीय संविधान कब लागू हुआ?

(A) 26 नवंबर 1949

(B) 15 अगस्त 1947

(C) 26 जनवरी 1950 ✅

(D) 24 जनवरी 1950


प्रश्न 6

संविधान सभा की मांग सबसे पहले किसने की थी?

(A) महात्मा गांधी

(B) एम. एन. रॉय ✅

(C) डॉ. अंबेडकर

(D) जवाहरलाल नेहरू


प्रश्न 7

भारतीय संविधान निर्माण में कुल कितना समय लगा?

(A) 2 वर्ष

(B) 2 वर्ष 6 महीने

(C) 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन ✅

(D) 3 वर्ष 2 महीने


प्रश्न 8

भारतीय संविधान का संवैधानिक सलाहकार कौन था?

(A) बी. एन. राव ✅

(B) के. एम. मुंशी

(C) अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर

(D) एन. गोपालस्वामी अयंगार


Quick Revision Table

विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
संविधान सभा की मांगएम. एन. रॉय (1934)
कैबिनेट मिशन योजना1946
पहली बैठक9 दिसंबर 1946
अस्थायी अध्यक्षडॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्षडॉ. राजेन्द्र प्रसाद
उद्देश्य प्रस्ताव13 दिसंबर 1946
उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकृत22 जनवरी 1947
प्रारूप समिति29 अगस्त 1947
प्रारूप समिति अध्यक्षडॉ. बी. आर. अंबेडकर
संविधान अंगीकृत26 नवंबर 1949
संविधान लागू26 जनवरी 1950
निर्माण अवधि2 वर्ष 11 माह 18 दिन
मूल अनुच्छेद395
मूल भाग22
मूल अनुसूचियाँ8
वर्तमान अनुसूचियाँ12

Last Minute One-Liner Revision

  • भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
  • संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के आधार पर हुआ।
  • संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
  • डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा पहले अस्थायी अध्यक्ष थे।
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे।
  • डॉ. बी. आर. अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
  • बी. एन. राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
  • उद्देश्य प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्तुत किया।
  • संविधान निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे।
  • संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ।
  • संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
  • मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं।
  • भारतीय संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने लिखी।
  • संविधान की मूल प्रति विशेष सुरक्षा में संरक्षित है।
  • 26 नवंबर को संविधान दिवस तथा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

परीक्षा में अक्सर होने वाली गलतियाँ

कई विद्यार्थी निम्न तथ्यों में भ्रमित हो जाते हैं—

❌ 26 नवंबर 1949 = संविधान लागू हुआ (गलत)

✅ 26 नवंबर 1949 = संविधान अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित हुआ।


❌ 26 जनवरी 1950 = संविधान बना (गलत)

✅ 26 जनवरी 1950 = संविधान लागू हुआ।


❌ डॉ. अंबेडकर संविधान सभा के अध्यक्ष थे (गलत)

✅ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे।


❌ संविधान सभा की पहली बैठक 15 अगस्त 1947 को हुई (गलत)

✅ पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।


इस पूरे अध्याय का सार (Quick Takeaways)

यदि आपको परीक्षा से ठीक पहले केवल 5 बातें याद रखनी हों, तो ये अवश्य याद रखें—

  1. संविधान सभा की मांग सबसे पहले एम. एन. रॉय (1934) ने की।
  2. संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के आधार पर हुआ।
  3. प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।
  4. संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया।
  5. भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

निष्कर्ष नहीं, बल्कि आपके लिए एक संदेश

भारतीय संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के सपनों, संघर्षों, लोकतांत्रिक आदर्शों और सामाजिक न्याय की भावना का जीवंत दस्तावेज है। इसे समझना केवल परीक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक बनने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

यदि आपने इस चार-भागीय श्रृंखला को ध्यानपूर्वक पढ़ लिया है, तो आपने “भारत के संविधान का निर्माण (Making of Indian Constitution in Hindi)” विषय को गहराई से समझ लिया है। अब नियमित पुनरावृत्ति और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से आप इस अध्याय से संबंधित लगभग हर प्रश्न का आत्मविश्वास के साथ उत्तर दे सकेंगे।