
मेजर अभिलाषा बराक ने बढ़ाया भारत का गौरव, मिला 2025 का संयुक्त राष्ट्र सैन्य लैंगिक समानता अधिवक्ता पुरस्कार
भारत की बेटियाँ आज हर क्षेत्र में नया इतिहास रच रही हैं। चाहे विज्ञान हो, खेल हो, अंतरिक्ष हो या फिर सेना—भारतीय महिलाएँ पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इसी कड़ी में भारतीय सेना की बहादुर अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर देश का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है।
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित ‘UN Military Gender Advocate of the Year Award’ के लिए मेजर अभिलाषा बराक के नाम की घोषणा की है। यह सम्मान उन सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है जो शांति अभियानों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, लैंगिक समानता और सामाजिक सहभागिता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह उपलब्धि सिर्फ भारतीय सेना के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।
क्यों खास है यह सम्मान?
मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन UNIFIL (United Nations Interim Force in Lebanon) में भारतीय बटालियन के साथ तैनात हैं। वहां वे फीमेल एंगेजमेंट टीम (Female Engagement Team – FET) की कमांडर के रूप में कार्य कर रही हैं।
संघर्ष और अस्थिरता से प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की स्थिति अक्सर बेहद कठिन हो जाती है। ऐसे माहौल में मेजर अभिलाषा ने स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के साथ भरोसेमंद संबंध बनाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा तथा सहायता से जोड़ने का काम किया।
उनके कार्यों ने यह साबित किया कि शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है।
मेजर अभिलाषा बराक को यह पुरस्कार क्यों मिला?
संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें निम्नलिखित महत्वपूर्ण योगदानों के लिए सम्मानित किया है—
स्थानीय महिलाओं से बेहतर संवाद
उन्होंने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और किशोरियों से सीधा संपर्क स्थापित किया और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया।
लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा
मेजर अभिलाषा ने साथी शांति सैनिकों को जेंडर सेंसिटाइजेशन यानी लैंगिक संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया ताकि महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना मजबूत हो सके।
महिलाओं की सुरक्षा और विश्वास
उन्होंने स्थानीय समुदायों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया।
शांति अभियानों में महिला नेतृत्व
उनका नेतृत्व यह दर्शाता है कि महिलाएँ कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं।
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
वर्ष 2022 में वे भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलट बनी थीं। उन्होंने आर्मी एविएशन कॉर्प्स में शामिल होकर इतिहास रच दिया था। उनकी इस उपलब्धि ने लाखों लड़कियों को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।
अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित होकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का गौरव बढ़ाया है।
क्या है UN Military Gender Advocate Award?
यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों में से एक माना जाता है।
स्थापना
इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र शांति संचालन विभाग (Department of Peace Operations – DPO) द्वारा की गई थी।
उद्देश्य
इस सम्मान का उद्देश्य उन सैन्य अधिकारियों को पहचान देना है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 को लागू करने में उत्कृष्ट भूमिका निभाते हैं।
यह प्रस्ताव मुख्य रूप से “महिलाएँ, शांति और सुरक्षा” (Women, Peace and Security) विषय पर केंद्रित है।
कब दिया जाता है यह पुरस्कार?
यह सम्मान हर वर्ष 29 मई को मनाए जाने वाले International Day of UN Peacekeepers के अवसर पर प्रदान किया जाता है।
भारत के लिए गर्व की बात: लगातार तीसरी बड़ी उपलब्धि
इस पुरस्कार के मामले में भारतीय महिला अधिकारियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है। मेजर अभिलाषा बराक यह सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं।
उनसे पहले—
| वर्ष | अधिकारी | मिशन |
|---|---|---|
| 2019 | मेजर सुमन गवानी | दक्षिण सूडान |
| 2023/24 | मेजर राधिका सेन | कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य |
| 2025 | मेजर अभिलाषा बराक | लेबनान (UNIFIL) |
यह लगातार तीसरी बार है जब भारतीय महिला अधिकारियों ने इस वैश्विक सम्मान पर अपना दबदबा कायम किया है।
महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर
मेजर अभिलाषा बराक की सफलता यह दिखाती है कि भारत में महिलाएँ अब केवल सीमित भूमिकाओं तक नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश में बदलती सोच और महिला सशक्तिकरण की सकारात्मक तस्वीर पेश करती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
मेजर अभिलाषा की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि—
- मेहनत और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है
- महिलाएँ हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं
- सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है
- भारत की बेटियाँ वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन कर रही हैं
परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| पुरस्कार का नाम | UN Military Gender Advocate of the Year Award 2025 |
| विजेता | मेजर अभिलाषा बराक |
| वर्तमान तैनाती | UNIFIL, लेबनान |
| विशेष उपलब्धि | भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलट |
| पुरस्कार शुरू हुआ | 2016 |
| संबंधित संस्था | संयुक्त राष्ट्र शांति संचालन विभाग (DPO) |
| आधार | UNSC Resolution 1325 |
| UN Peacekeepers Day | 29 मई |
| भारत की उपलब्धि | तीसरी भारतीय महिला अधिकारी को सम्मान |
